ईरान में अमरीका के एक जासूसी नेटवर्क को ध्वस्त किए जाने और 17 जासूसों की गिरफ़्तारी की ख़बर सामने आने के बाद अपेक्षा के अनुसार अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने इस बड़ी पराजय को स्वीकार करने से इन्कार कर दिया है। उन्होंने इस मामले पर ट्वीट करके कहा हैः "सीआईए के जासूसों को पकड़ने संबंध ईरान की रिपोर्ट पूरी तरह ग़लत है और इसका सच्चाई से कोई लेना देना नहीं है। फिर झूठ और फिर प्रोपेगंडा, एक धार्मिक सरकार की ओर से जो बुरी तरह संकट में ग्रस्त है और उसकी समझ में नहीं आ रहा है कि क्या करे? उनकी अर्थ व्यवस्था मर चुकी है और इससे भी बुरी होगी। ईरान पूरी तरह से एक फ़ज़ीहत है।" ट्रम्प ने तथ्यों को देखे बग़ैर बौखला कर इस समाचार का खंडन किया है और ईरानी ड्रोन को मार गिराने के दावे की तरह उन्हें फिर से शर्मिंदा होना पड़ेगा। ट्रम्प ने वाइट हाउस में दावा किया था कि एक अमरीकी युद्धपोत ने एक ईरानी ड्रोन को मार गिराया है लेकिन बाद में उनका दावा झूठा सिद्ध हो गया।
ईरान के गुप्तचर मंत्रालय ने रविवार को सीआईए के 17 जासूसों को पकड़ने की सूचना दी थी जो ईरान के संवेदनशील विभागों में पैठ बनाने की कोशिश में थे। सोमवार को इस संबंध में संचार माध्यमों के समक्ष प्रमाण व साक्ष्य पेश किए गए। ईरान के गुप्तचर विभाग ने कई अमरीकी जासूसों के चित्र भी जारी किए हैं और उनके बारे में संक्षिप्त सूचनाएं भी दी हैं। अमरीका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने, जो पिछले साल तक सीआईए के चीफ़ थे, इस मामले में कुछ भी कहने से इन्कार कर दिया अलबत्ता उन्होंने भी खिसिया कर यह दावा अवश्य किया कि ईरान का झूठ बोलने का अतीत है। जबकि संसार जानता है कि ईरान, जो कहता है वह करके दिखाता है और कभी झूठ नहीं बोलता।